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भाजपा की समर्थक निर्दलीय विधायक गीता जैन ने थामा शिवसेना का भगवा झंडा!

बिन शर्त समर्थन देने के बावजूद भाजपा में उचित सम्मान ना मिलने से लिया निर्णय

मीरा भाईंदर, प्रतिनिधि: आखिरकार 145 मीरा भाईंदर विधानसभा क्षेत्र की निर्दलीय विधायिका गीता जैन ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में शिवसेना में अधिकृत रूप से प्रवेश कर पिछले कई दिनों से उनके राजनैतिक भविष्य पर चल रही चर्चा पर विराम लगा दिया है। गीता जैन ने दशहरे के शुभ मुहूर्त पर पालक मंत्री एकनाथ शिंदे, सांसद राजन विचार, विधायक प्रताप सरनाईक और पूर्व विधायक गिल्बर्ट मेंडोंसा की उपस्थिति में शिवसेना में प्रवेश कर लिया!
गीता जैन के शिवसेना में प्रवेश करने से भाजपा को एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि जब गीता जैन ने मीरा भाईंदर शहर के दिग्गज नेता और भाजपा के ही कद्दावर उम्मीदवार नरेंद्र मेहता को हराते हुए एतिहासिक जीत हासिल की थी तभी उन्होंने भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर भाजपा को बिना किसी शर्त के अपना समर्थन देने की घोषणा की थी लेकिन बाद में महाराष्ट्र राज्य के राजनैतिक समीकरण बदल गए और भाजपा की सरकार बनने की बजाए शिवसेना के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी की सरकार बनी। इसके बावजूद गीता जैन ने भाजपा को अपना समर्थन जारी रखा था लेकिन उसके बाद शहर के राजनीति में उनके खिलाफ गुटबाज़ी होने लगी। क्योंकि उन्होंने भाजपा के ही दिग्गज उम्मीदवार और शहर के भाजपा के सर्वेसर्वा नरेंद्र मेहता को शर्मनाक तरीके से हराया था इसलिए नरेंद्र मेहता समर्थकों को यह बात हज़म नही हो रही थी और इसीलिए मेहता समर्थक कई मौकों पर गीता जैन को नजरअंदाज कर रहे थे उन्हें पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में बुलाया नही जा रहा था तो पार्टी के किसी भी होर्डिंग या बैनर पर उनका फोटो भी नही डाला जा रहा था। इसी कारण मीरा भाईंदर शहर में नरेंद्र मेहता समर्थक और गीता जैन समर्थक ऐसे दो खेमों में भाजपा बंट गई थी।गीता जैन विधायक होने के बावजूद भी पार्टी के प्रदेश के नेता उन्हें उचित समान नही दे पा रहे थे और तभी से यह अटकलें लगाई जा रही थी कि शायद गीता जैन अब भाजपा में ज्यादा दिन टिक नहीं पाएंगी। गीता जैन के शिवसेना में प्रवेश करने से मीरा भाईंदर के राजनैतिक समीकरण के बड़ा बदलाव आनेवाला है। एक ओर इससे शिवसेना मजबूत होगी तो भाजपा को इससे काफी नुकसान होनेवाला है। अब देखा जाए तो एक तरह से मीरा भाईंदर शहर के दोनों विधानसभा सीटों पर शिवसेना का कब्जा हो चुका है लेकिन इसका शहर के महानगर पालिका के राजनीति पर क्या असर होगा यह तो आनेवाला समय ही बताएगा।

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सर्व हक्क मुख्य संपादक यांचे कडे असून त्यांच्या परवानगी शिवाय काहीही कॉपी करू नाही.
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