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ऑफ़लाइन महासभा लेने की मांग को लेकर भाजपा के बाग़ी नगरसेवकों का गुट मिला आयुक्त से।

भाजपा के नगरसेवकों के बीच के मतभेद एकबार फिर खुलकर सामने आ गए हैं।

मीरा भाईंदर, प्रतिनिधि : ऑफलाइन महासभा लेने की मांग को लेकर सत्ताधारी भाजपा के लगभग 15 से भी ज्यादा बाग़ी नगरसेवकों के एक गुट ने बुधवार 27 जनवरी को मनपा आयुक्त डॉ विजय राठौड़ के साथ एक बैठक कर आनेवाली महासभा ऑफ़लाइन कराने की मांग की है। इन सभी नगरसेवकों का सीधा आरोप है कि ऑनलाइन महासभा में उन्हें बोलने नहीं दिया जाता।

देश में फैले कोरोना महामारी के कारण पिछले कई महीनों से देशभर में आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है जिसके कारण दो व्यक्तियों के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी रखना, मुंह पर मास्क पहनना और हाथों को बार बार धोते रहना ऐसे कड़े नियम लागू किये गए थे। साथ ही पूरे देश के लॉक डाउन भी लगाया गया था जिसके चलते देशभर में सभी कारखाने, स्कूल, कॉलेज और सभी सरकारी कार्यालयों में लोगों की भीड़ इकट्ठा होने पर रोक लगाई गई थी। यही कारण था कि मीरा भाईंदर महानगर पालिका में हर महीने बुलाई जानेवाली महासभा भी ऑनलाइन यानी कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा बुलाई जा रही थी।

पिछले कई महीनों से विरोधी पार्टियों के कई नगरसेवक आरोप लगाते रहे हैं कि इस ऑनलाइन महासभा में शहर के विकास कार्यों से संबंधित विषयों पर होनेवाली चर्चा में उन्हें बोलने नहीं दिया जाता और उनकी आवाज़ म्यूट यानी कि बंद की जाती है या फिर उनके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का कनेक्शन जानबूझकर काट दिया जाता है और इस तरह उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। लेकिन अब इसी तरह के आरोप सत्ताधारी नगरसेवकों के एक गुट ने भी लगाए हैं जिसके चलते शहर की राजनीति फिर एकबार गर्मा गई हैं।

मीरा भाईंदर शहर में भारतीय जनता पार्टी के नगरसेवकों के बीच गुटबाजी थमती नजर नहीं आ रही है। पिछले कई महीनों से भाजपा के नगरसेवकों का एक अलग गुट जो कि पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता का विरोधी गुट बताया जाता है उन्होंने अपना अलग मोर्चा खोल रखा है। इन नगरसेवकों का आरोप है कि ऑनलाइन महसभा में कई नगरसेवकों को बोलने नहीं दिया जाता, शहर के विकास कार्यों से संबंधित किसी विषय पर जब चर्चा होती है तब उन्ही नगरसेवकों को बोलने का समय दिया जाता है जो पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता के करीबी माने जाते हैं और जब बाकी नगरसेवक बोलना चाहते हैं तो उनका माइक या तो म्यूट किया जाता है या फिर उनका विडीओ कनेक्शन डिस्कनेक्ट किया जाता है।

अब चूंकि देशभर में सभी कामकाज सामान्य रूप से किये जा रहे हैं लोगों पर लगी पाबंदीयाँ काफी हद तक हटाई गई है, और अब तो कोरोना की वैक्सीन भी आ चुकी है तो ऐसे में अब ऑनलाइन महासभा बुलाने का कोई औचित्य नहीं है और इसी मांग को लेकर रोहिदास पाटील, रवि व्यास, चंद्रकांत वैती, नीला सोंस, सुरेश खंडेलवाल, मदनसिंह, पंकज पांडेय, विजय रॉय, दौलत गजरे समेत सत्ताधारी भाजपा के लगभग 15 से भी ज्यादा बाग़ी नगरसेवकों के एक गुट ने मीरा भाईंदर मनपा आयुक्त डॉ विजय राठौड़ से मुलाकात कर ऑफलाइन महासभा लेने की मांग की।

सूत्रों की मानें तो इस अवसर पर शहर के विकास कार्यों से संबंधित और भी कई विषयों पर चर्चा की गई लेकिन बताया जाता है कि इस बहाने से भाजपा पार्टी के समर्थक नगरसेवक और पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता समर्थक नगरसेवकों के बीच के मतभेद एकबार फिर से खुलकर सामने आ गए हैं।

इन नगरसेवकों की मुख्य मांग थी कि ऑनलाइन महासभा में उन्हें बोलने नहीं दिया जाता और मीरा भाईंदर शहर के विकास कार्यों से संबंधित कई विषयों पर चर्चा नहीं हो पा रही है। उनका आरोप था कि महापौर उन्हीं लोगों को बोलने देती है जो जिनको वह बोलने देना चाहती है, बाकी लोगों की आवाज तकनीकी खामी का हवाला देकर ऑनलाइन महासभा में या तो म्यूट कर दी जाती है या फिर उनका वीडियो कनेक्शन काट दिया जाता है। साथ ही भाजपा के नाराज नगर सेवकों का गुट इस बात पर भी अड़ा रहा कि आने वाले महासभा ऑफलाइन की जाए।

मीरा भाईंदर शहर में सत्ताधारी भाजपा के कुल 61 नगरसेवक होने के बावजूद एक गुट है जो पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता समर्थकों का गुट है और दूसरा गुट है जो नरेंद्र मेहता के विरोधी नगरसेवकों का गुट है और इनके बीच की लड़ाई मनपा में सत्ता केंद्र को अपने हाथ में रखने को लेकर चल रही है और अब देखना होगा कि इस लड़ाई में किसकी हार होती है और किसकी जीत होती है।

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सर्व हक्क मुख्य संपादक यांचे कडे असून त्यांच्या परवानगी शिवाय काहीही कॉपी करू नाही.
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