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उन्नाव रेप केस के मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत सभी अभियुक्तों को दिल्ली की तीस हज़ारी अदालत ने शुक्रवार को 10 साल क़ैद की सज़ा सुनाई !
13/03/2020

उन्नाव रेप केस के मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत सभी अभियुक्तों को 10 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. दिल्ली की तीस हज़ारी अदालत ने शुक्रवार को सज़ा सुनाई. ये मामला उन्नाव रेप केस की पीड़ित के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत का है. सेंगर पहले बीजेपी के विधायक थे लेकिन पार्टी ने बाद में उन्हें निकाल दिया था. कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सेंगर को भी 10 साल की सज़ा सुनाई गई है. क़ैद के अलावा इन दोनों भाइयों को दस-दस लाख का जुर्माना भी अदा करना होगा. ये जुर्माना पीड़ित के परिवार को दिया जाएगा. इससे पहले कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव रेप केस मामले में अपहरण और बलात्कार के दोषी क़रार दिए जा चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ये मामला लखनऊ की अदालत से दिल्ली की एक अदालत में ट्रांसफ़र किया गया. जिसके बाद पाँच अगस्त, 2019 से रोज़ाना इस मामले की सुनवाई चल रही थी. साल 2017 में कुलदीप सेंगर पर एक महिला ने अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाया था. जिस वक़्त ये घटना हुई थी उस वक़्त महिला नाबालिग़ थी. पीड़िता सेंगर के घर नौकरी के लिए बात करने गई थी जिसके बाद उसने विधायक के घर पर उसके साथ बलात्कार किए जाने का आरोप लगाया था. सेंगर पर पीड़िता के सामूहिक बलात्कार, उसके और उसके परिवार के ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश और हमले का, पीड़िता के पिता को ग़लत मामले में फंसाने का और फिर हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सुनवाई चली थी. पीड़िता का बयान दर्ज करने के लिए दिल्ली के एम्स अस्पताल में एक ख़ास अदालत बैठी थी. कुलदीप सेंगर उत्तर प्रदेश के उन्नाव की बांगरमऊ सीट से चार बार बीजेपी के विधायक रह चुके हैं. उन पर आरोप लगने के बाद अगस्त में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. अगस्त में अदालत ने सेंगर और शशि सिंह पर बच्चों के ख़िलाफ़ य़ौन हिंसा (पोक्सो) क़ानून की धारा 376 और 363 के तहत आरोप तय किए थे. घटनाक्रम : 4 जून 2017- पीड़िता ने बताया कि वह विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के यहां नौकरी दिलाने में मदद मांगने के लिए उनसे मिलने गई और विधायक के घर पर उसका रेप किया गया. 11 जून 2017- इसके बाद 11 जून को लड़की ग़ायब हो गई, जिसके बाद लड़की के परिवार वालों ने उसकी ग़ुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. 20 जून, 2017- पीड़िता लड़की औरैया के एक गांव से मिली और उसे अगले दिन उन्नाव लाया गया. 22 जून, 2017- पीड़िता की कोर्ट में पेशी हुई और सीआरपीसी की धारा 164 के तहत उसका बयान दर्ज हुआ. पीड़िता का आरोप था कि पुलिस ने बयान में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का नाम नहीं लेने दिया. 3 जुलाई 2017- बयान दर्ज करवाने के 10 दिन बाद पीड़िता को पुलिस ने परिजनों को सौंपा और पीड़िता दिल्ली आ गई. पीड़िता ने कहा कि पुलिस ने उसका शोषण किया. पीड़िता ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाई अतुल सिंह सेंगर का नाम एफ़आईआर में शामिल किया जाए. 24 फरवरी, 2018- पीड़िता की मां सामने आईं और उन्नाव के चीफ़ ज्यूडिशिल मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख़ किया और सीआरपीसी के सेक्शन 156 (3) के तहत एफ़आईआर दर्ज करने की मांग की. 3 अप्रैल, 2018- लड़की के पिता के साथ विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर ने मारपीट की. 4 अप्रैल, 2018- इसके बाद उन्नाव पुलिस ने लड़की के पिता पर ग़ैर-क़ानूनी रूप से हथियार रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ़्तार कर लिया. 8 अप्रैल, 2017- पीड़िता ने विधायक पर एफ़आईआर दर्ज कराने को लेकर सीएम आदित्यनाथ के आवास सामने आत्मदाह करने की कोशिश की. इस मामले में पुलिस पर उदासीनता का आरोप लगाया और परिवार ने आरोप लगाया कि एफ़आईआर दर्ज कराने के बाद उन्हें परेशान किया जा रहा है. 9 अप्रैल, 2018- लड़की के पिता की कस्टडी में मौत हो गई. 10 अप्रैल, 2018- पिता की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उन्हें 14 जगह चोटें लगने की बात सामने आई. इस मामले में छह पुलिस वालों को सस्पेंड भी किया गया और मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए. 11 अप्रैल, 2018- राज्य की योगी सरकार ने ये केस सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए. 12 अप्रैल, 2018- नाबालिग से रेप के मामले में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को अभियुक्त बनाया गया. लेकिन गिरफ्तारी नहीं की गई. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया और राज्य सरकार से पूछा कि सरकार विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी करेगी या नहीं. 13 अप्रैल, 2018- सीबीआई ने विधायक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, उसके बाद गिरफ्तारी की और मामले में नई एफ़आईआर दर्ज की गई. 11 जुलाई, 2018- सीबीआई ने इस केस में पहली चार्जशीट दायर की जिसमें विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का नाम रखा गया. 13 जुलाई, 2018- इस इस मामले में दूसरी चार्जशीट दायर की गई और पीड़िता के पिता को कथित तौर पर फंसाने के मामले में कुलदीप सेंगर, भाई अतुल सेंगर और कुछ पुलिस वालों को अभियुक्त बनाया गया. इस मामले में कुलदीप सेंगर, अतुल सेंगर सहित सात लोग अभियुक्त हैं. 28 जुलाई 2019- पीड़िता अपने अपनी चाची, मौसी और वकील के साथ रायबरेली जा रही थी, जहां कार को ट्रक ने टक्कर मारी. ये एक्सीडेंट इतना भयानक था कि हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई. पीड़िता और उसके वकील का इलाज लखनऊ के किंग जॉर्ज अस्पताल में चला और दोनों को लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया. जिस ट्रक के साथ कार का एक्सीडेंट हुआ उसके नंबर प्लेट पर ग्रीस लगाकर नंबर छुपाया गया था. 1 अगस्त 2019- उस वक्त चीफ़ जस्टिस रहे रंजन गोगोई ने सभी पांचों मामले लखनऊ की अदालत से दिल्ली की एक सीबीआई अदालत को ट्रांसफ़र करने के आदेश दिए. उन्होंने इस मामले की सुनवाई रोज़ाना करने के लिए आदेश दिए और कहा कि 45 दिनों में सुनवाई पूरी की जाए. 2 अगस्त, 2019- सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के चाचा को सुरक्षा कारणों से रायबरेली की जेल से दिल्ली के तिहाड़ जेल शिफ़्ट करने का आदेश दिया. 5 अगस्त, 2019- सुप्रीम कोर्ट पीड़िता को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ से ल्ली लाने का आदेश दिया. 9 अगस्त, 2019- दिल्ली की एक सत्र अदालत ने कुलदीप सेंगर के ख़िलाफ़ आरोप तय कर दिए. उन पर पर बलात्कार [376 (1)] और आपराधिक साज़िश [(120 B)] समेत आईपीसी की कई धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं. साथ ही पॉक्सो एक्ट के सेक्शन तीन और चार के तहत भी मामला दर्ज किया गया. 14 अगस्त, 2019- पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सेंगर समेत नौ लोगों पर कोर्ट ने आरोप तय किए. 7 सितंबर, 2019- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के एम्स में अस्थाई तौर पर कोर्ट लगाने का आदेश दिया ताकि पीड़िता का बयान दर्ज किया जा सके. 29 सितंबर, 2019- दिल्ली महिला आयोग ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में पीड़िता और उसके परिवार के लिए अस्थाई तौर पर (11 महीनों के लिए) रहने की व्यवस्था एक सुरक्षित स्थान पर की जाएगी. 11 अक्तूबर, 2019- पीड़िता की कार पर हमले के मामले में सीबीआई ने कुलदीप सेंगर के ख़िला़ चार्जशीट दायर की. 10 दिसंबर, 2019- कोर्ट ने 16 दिसंबर के लिए अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा. अगर दोनों पक्षों में से किसी की भी तरफ से किसी बिंदु पर नए सिरे से बहस की मांग नहीं हुई तो फ़ैसला सुना दिया जाएगा. 16 दिसंबर, 2019- कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को अपहरण और बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया. अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में सेंगर कांग्रेसी थे. 2002 के चुनावों से पहले उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया और कांग्रेस के प्रत्याशी को बड़े अंतर से हरा दिया. 2007 आते-आते उनकी छवि बाहुबली की बन गई थी. इसके बाद उन्होंने सपा का दामन थाम लिया. 2012 में भी सपा के टिकट पर उन्होंने चुनाव जीता और 2017 में बीजेपी के टिकट पर वह विधायक बन गए. यानी 2002 से वो लगातार विधायक हैं और अपने राजनीतिक करियर में यूपी की सभी अहम पार्टियों में रहे हैं. 2002 से 2017 के बीच वो बीएसपी, एसपी से विधायक रहे हैं और अभी बीजेपी से विधायक हैं. हालांकि बीजेपी का कहना है कि उन्हें पार्टी से निलंबित किया जा चुका है.

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