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वॉकहार्ड अस्पताल में सफलता पूर्वक किडनी ट्रान्सप्लांट कर 43 वर्षीय मरीज को मिला नया जीवन!

मुंबई, प्रतिनिधि: मीरारोड स्थित वॉकहार्ड अस्पताल में एक 73 वर्षीय ब्रेनडेड मरीज ने अंगदान करके कई सालों से किडनी की प्रतीक्षा कर रहें एक मरीज की जान बचाई हैं। मीरारोड स्थित वॉकहार्ड अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट और ट्रान्सप्लांट फिजिशियन डॉ. पुनीत भुवानिया और कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. आशुतोष बघेल ने संयुक्त रूप से यह ट्रांसप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं।

दिल्ली निवासी सौरव मुखर्जी (43) यह मरीज क्रोनिक किडनी डिसीज (सीकेडी) से पिडीत था। पिछले 4 साल से वह डायलिसस पर थे। डॉक्टरोंने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। मरीज ने किडनी के लिए झोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (झेडटीसीसी) और वॉक्हार्ट के कैडेवर प्रोग्राम में अपना पंजीकरण कराया था।

ब उन्हें वॉकहार्ड हॉस्पिटल की ओर से फोन किया गया तो वह तुरंत दिल्ली से मुंबई पहुंचे और आवश्यक क्रॉस-मैच परीक्षण के बाद, मीरारोड के वॉकहार्ड अस्पताल में सफलता पूर्वक किडनी ट्रान्सप्लांट सर्जरी हुई हैं। सर्जरी के बाद 10 दिनों में उन्हें डिस्जार्च दिया गया।

मीरारोड स्थित वॉकहार्ड अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट और ट्रान्सप्लांट फिजिशियन डॉ. पुनीत भुवानिया जानकारी देते हुए बताते हैं की, ‘’73 वर्षीय मरीज को ब्रेनडेड घोषित करने के बाद उनके परिजनों ने उनके अंगदान करने का निर्णय लिया। इस ब्रेनडेड मरीज के अंगदान से छह लोगों को नया जीवन मिला हैं। यह मरीज के गुर्दे, यकृत, किडनी, फेफडे और त्वचा का दान किया गया है। इसमें ब्रेनडेड व्यक्ती की किडनी वॉक्हार्ट अस्पताल में अंगदान की प्रतीक्षा यादी में रहनेवाले एक मरीज दी गई हैं।

अस्पताल में इस मरीज की किडनी ट्रान्सप्लांट हुई हैं। सर्जरी के बाद मरीज की सेहत में सुधार देखकर उन्हें १० दिन बाद डिस्जार्च दिया गया हैं’’

डॉ. भुवानिया ने आगे बताया की, ‘’एक ब्रेनडेड व्यक्ती के अंगदान से कम से कम आठ लोगों को नई जिंदगी मिल सकती हैं। ब्रेनडेड मरीज के गुर्दे, यकृत, हृदय, आंत, आंखे, फेफडे, अग्नाशय और त्वचा का दान किया जा सकता हैं। हर साल लगभर 50,000 से अधिक लोगों को गुर्दा (किडनी) प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती हैं। लेकिन अंगदान के बारे में जागरूकता की कमी के कारण लोग अंगदान के लिए आगे नहीं आते। अंगदान कम होने के कारण जरूरतमंदों को प्रत्यारोपण के लिए काफी लंबी प्रतीक्षा करनी पडती हैं। इसलिए सभी लोगों के अंगदान का संकल्प करना चाहिए, क्योंकी मरने के बाद भी हम अंगदान कर कई लोगों की जान बचा सकते हैं’’

मरीज सौरव ने कहा की, “किडनी फेल होने के बाद मुझे किडनी ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत थी। मेरी जान बचेगी या नहीं मुझे कुछ भी पता नही था। लेकिन वॉकहार्ड अस्पताल के प्रयासों के कारण मुझे समय पर किडनी मिली हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के कारण मेरी जान बची हैं। मेरी इच्छा है कि अधिक से अधिक लोग आगे आएं और लाखों लोगों की जान बचाने के लिए अपने अंगों का दान करें’’

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