Sat. Nov 27th, 2021

भाईंदर : मीरा भाईंदर महानगरपालिका प्रभाग समिति कार्यालय क्र. 2 क्षेत्र में भू माफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर अनाधिकृत निर्माण किये गए हैं। ऐसे भू माफियाओं द्वारा किये गए अवैध निर्माणों के विरुद्ध विगत कुछ सप्ताह से अत्यधिक तोड़क कार्यवाही की जा रही है।

मीरा भाईंदर महानगरपालिका के उपायुक्त (अतिक्रमण विभाग) मारुति गायकवाड़ के नेतृत्व में विभिन्न वार्डों में अनधिकृत बांधकामों की समीक्षा के लिए एक विशेष बैठक बुलाई गई। इस समय हुई बैठक में उपायुक्त द्वारा अनधिकृत निर्माण, पेडलर, गैरेज, फुटपाथ व्यापारियों, अनाधिकृत होर्डिंग्स, अनाधिकृत झोंपड़ियों पर कार्रवाई करने का आदेश। इसी प्रकार वार्ड में अनाधिकृत निर्माणों की निगरानी करने की जिम्मेदारी इंजीनियरों और बीट इंस्पेक्टरों पर सौंपी गई और अगर किसी प्रभाग में अवैध निर्माण किये जाते है तो इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार इंजीनियरों और बीट इंस्पेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया गया।


मीरा भाईंदर महानगरपालिका क्षेत्र में वार्ड 14 अक्टूबर 2021 को प्रभाग समिति क्रमांक – 2 शास्त्रीनगर व नेहरू नगर क्षेत्र में अनधिकृत
महानगरपालिका अतिक्रमण विभाग ने झुग्गि झोपड़ीयों को तोड़कर ध्वस्त कर दिया। आयुक्त दिलीप ढोले के आदेशानुसार और उपायुक्त (अतिक्रमण) मारुति गायकवाड़ के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गयी। अतिक्रमण विभाग प्रमुख नरेंद्र चव्हाण, सहायक आयुक्त वार्ड नंबर 2 प्रियंका भोसले, सहायक आयुक्त चंद्रकांत बोरसे, कनिष्ठ अभियंता वैभव कुलठे, सुदर्शन काले, विकास शेलके, संदीप जटालकर, फेरीवाला दस्ता प्रमुख माने, भैरु नाइक की मौजूदगी में अतिक्रमण विभाग के कर्मचारी, महाराष्ट्र सुरक्षा बल और पुलिस कर्मी की सहायता से इस अवैध निर्माण की तोड़क कार्रवाई की गई है ।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल है की जब इस प्रकार से अवैध निर्माण किये जाते हैं तभी प्रभाग अधिकारी इस अवैध निर्माण को रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं करते? अगर समय रहते अवैध निर्माण को होने से रोका जाएगा तो इस प्रकार से तोड़क कार्रवाई करने में जो महारनगर पालिका का को खर्च उठाना पड़ता है उससे बचा जा सकता है लेकिन बताया जाता है की जब भू माफियाओं द्वारा अवैध निर्माण किये जाते हैं तो वो सबसे पहले प्रभाग अधिकारी से आकर मिलते हैं और एक मोटी रकम देकर अवैध बांधकाम को बचाने की जिम्मेदारी प्रभाग अधिकारी को दि जाती है। और यही कारण है की शहर में बड़े पैमाने पर आज भी अवैध निर्माण धड़ल्ले से किये जा रहे हैं।


महाराष्ट्र महानगर पालिका अधिनियम- १९४९ की धारा ३९७ (ख) के अनुसार जिस प्रभाग अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में अवैध निर्माण किये जाते हैं और उसकी जानकारी होने के बावजूद अगर प्रभाग अधिकारी उस अवैध निर्माण को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करते तो उनके ऊपर धारा ३९७ (ख) के अनुसार आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। तो जबतक इन भ्रष्ट प्रभाग अधिकारियों पर इन धाराओं के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती शहर में हो रहे अवैध निर्माण नहीं रोके जा सकते।

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