प्राचीन भारतीय विरासत और आधुनिक विज्ञान का क्रांतिकारी कदम: प्रोजेक्ट विज्ञान दर्शन लॉन्च

मीरारोड ता. 27 (संवाददाता) : भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच के संबंधों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘प्रोजेक्ट विज्ञान दर्शन’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया। मीरा भाईंदर के गानसम्राज्ञी लता मंगेशकर नाट्यगृह में ‘विज्ञान दर्शन रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन’ (VDRO) द्वारा आयोजित “वैदिक भारत यूथ थिंकर्स डायलॉग २०२६” के दौरान गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मुख्य अतिथि के रूप में इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्घाटन किया।

इस राष्ट्रीय परिषद में देशभर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, गुरुद्वारों के आचार्यों, उद्योग जगत के दिग्गजों और युवा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ता, इसरो के पूर्व निदेशक डॉ. चंद्रकांत रविकांती और वीडीआरओ के अध्यक्ष मोहित गौर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा, “भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान और विज्ञान की भूमि रहा है। हमारे वेद, उपनिषद और ऋषियों के शोध केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि उस दौर का उन्नत विज्ञान थे। ‘प्रोजेक्ट विज्ञान दर्शन’ हमारी इसी समृद्ध विरासत को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने वाला एक क्रांतिकारी कदम है।” उन्होंने आगे कहा, “आज के युवा शोधकर्ताओं को अपनी जड़ों से जुड़ना चाहिए। अंधविश्वास को पीछे छोड़कर तार्किक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वैदिक ज्ञान का अध्ययन करना समय की मांग है।”
कार्यक्रम में युवा शोधकर्ता मोहित गौर ने क्वांटम फिजिक्स और वैदिक दर्शन के अंतर्संबंधों पर अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा पीढ़ी को सनातन धर्म और वैदिक सिद्धांतों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए।
आईआईटी बॉम्बे और वीडीआरओ द्वारा संचालित यह अनुसंधान पहल युवाओं को प्राचीन भारतीय विज्ञान पर शास्त्रीय और वैज्ञानिक पद्धति से शोध करने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे देश को पुनः ‘विश्वगुरु’ के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।




